मानसिक स्वास्थ्य · स्कंद 4
क्रोध पर काबू
एक बार के क्रोध ने दक्ष का सब कुछ राख कर दिया — आपके घर में क्या हो रहा है
मूल शिक्षा
अनियंत्रित क्रोध उसे नष्ट करता है जो आपको प्रिय है
- कथा / श्लोक संदर्भ
- दक्ष यज्ञ — सती (4.2–7)
- स्कंध
- स्कंद 4 — विपरीत परिस्थिति में भक्ति
इस स्कंध का सार
विरोध के बावजूद भक्ति; अहंकार बनाम समर्पण
ध्रुव की पाँच वर्ष की तपस्या (4.8–12)
किन समस्याओं के लिए: माता-पिता से मतभेद, क्रोध, दफ्तर का धोखा · 31 अध्याय
आगे क्या करें
यह प्रसंग पुस्तक “श्रीमद्भागवत कथा — समग्र अनुशीलन” में विस्तार से पढ़ा जा सकता है। किसी प्रश्न पर सीधे बात करना चाहें तो व्हाट्सएप करें।